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होम बायर्स के लिए ‘रियल डिस्काउंट’

Saturday, February 21, 2015

मुंबई/नई दिल्ली। घर खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब प्रॉपर्टी पर बड़ी कंपनियां भी 'वास्तविक छूट' दे रही हैं। मुंबई, एनसीआर, बेंगलुरु और कोलकाता में बिल्डर्स के इन ऑफर्स पर नजर डालिए। फ्लैश सेल्स में प्रति वर्ग फुट रेट पर करीब 25 पर्सेंट की छूट, होम लोन रेट्स पर करीब 3 पर्सेंट का इंट्रेस्ट सबवेंशन, लग्जरी रेजिडेंशल प्रॉपर्टी में टॉप फ्लोर पर घर खरीदने वालों को फ्री स्टूडियो अपार्टमेंट्स, फ्री मॉड्युलर किचन, एसी और यहां तक कि वॉर्डरोब भी ऑफर किए जा रहे हैं।

दरअसल, इकनॉमिक सेंटिमेंट मजबूत होने के बावजूद रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर इनवेंटरी बची हुई है। पिछले साल दिसंबर के अंत तक 83.20 करोड़ वर्ग फुट की इनवेंटरी थी। वहीं इस क्वॉर्टर में सेल्स में भी 8 पर्सेंट की गिरावट आई थी। यह जानकारी लियासेज फोरास के डेटा से मिली है।

नीलाम होने वाली प्रॉपर्टी खरीदना कितना बेहतर?
घरों की सप्लाई बढ़ने के चलते बिल्डर्स को डिस्काउंट देना पड़ रहा है। वहीं जिन इन्वेस्टर्स ने अच्छे रिटर्न की उम्मीद में घर खरीदे थे, वे भी फंसे हुए हैं। उनमें से कुछ मार्केट रेट से कम दाम पर घर बेचने को तैयार हैं। इसलिए कागजों पर भले ही घरों की कीमत अधिक बताई जा रही है, लेकिन वह रियल एस्टेट मार्केट की असल तस्वीर नहीं है। बिल्डर्स कागजों पर बताई गई कीमत पर अच्छा-खासा डिस्काउंट दे रहे हैं। हालांकि वे गलत मेसेज से बचने के लिए कागजों पर बताई गई कीमत कम करने को तैयार नहीं हैं।

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख हाउसिंग मार्केट में कई तेजी और बुलबुला फूटते हुए देख चुके हैं। उनका कहना है कि अभी घर खरीदने का सबसे अच्छा समय है। पारेख का कहना है कि महंगे घर नहीं बिक रहे हैं। मुंबई के लिए इसका मतलब यह है कि 1 करोड़ रुपये से अधिक के घर को कम खरीदार मिल रहे हैं। BigDeals.in के सीईओ अश्विन चावला समझाते हैं कि क्यों बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां बेसब्र हैं। उनका कहना है कि बिल्डर्स की सेल्स कमजोर बनी हुई है। उन्हें कंस्ट्रक्शन लोन के लिए अधिक बुकिंग दिखाने की जरूरत पड़ती है।

एस्टेट एजेंट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट यशवंत दलाल का कहना है कि रियल एस्टेट कंपनियां एजेंट्स को भारी इनसेंटिव दे रही हैं। इसके बावजूद मार्केट में बायर्स की कमी है। दलाल का कहना है, 'ऐसे मार्केट में बिल्डर्स के पास इनसेंटिव और ऑफर्स देने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।'

इकनॉमिक टाइम्स ने देशभर में बिल्डर्स से बात करके डिस्काउंट्स को समझने की कोशिश की। हम यहां उनकी एक छोटी लिस्ट दे रहे हैं।

1. टाटा हाउसिंग डिवेलपमेंट कंपनी और दोस्ती ग्रुप 7.99 पर्सेंट पर सब्सिडाइज्ड होम लोन दे रहे हैं, जबकि बैंकों का होम लोन रेट 10.5 पर्सेंट है। दोस्ती का ऑफर ठाणे और वडाला प्रॉजेक्ट्स के लिए है। टाटा हाउसिंग की स्कीम 8 शहरों में 25 प्रॉजेक्ट्स की खातिर है।

2. लोढ़ा ग्रुप ने ठाणे के वागले एस्टेट में एक दिन की फ्लैश सेल्स आयोजित की। इसमें अपार्टमेंट्स 8,406 वर्ग फुट की कीमत पर ऑफर किए गए, जबकि लोकल मार्केट का रेट 11,500 वर्ग फुट है।

3. नेप्च्यून ग्रुप मुंबई के भांडुप में 50 पर्सेंट पेमेंट पर भी होम बायर्स को पजेशन का ऑफर दे रहा है। बाकी का पैसा 36 किस्तों में चुकाना है।

4. बेंगलुरु के लीला रेजिडेंसी, ब्रिगेड क्रीसेंट और मार्वल डिवेलपर्स महंगे घरों में लग्जरी मॉड्युलर किचन, एसी और टॉप रेंज वॉर्डरोब फ्री में दे हे हैं।  बेंगलुरु में नीतेश एस्टेट और एचएम ग्रुप जैसे बड़े बिल्डर्स 15 पर्सेंट का कैश डिस्काउंट दे रहे हैं।

5. एनसीआर में सुपरटेक नोएडा के केपटाउन प्रॉजेक्ट में टॉप फ्लोर्स खरीदने वालों को ग्रेटर नोएडा में स्टूडियो अपार्टमेंट फ्री में ऑफर कर रहा है।  वहीं गुड़गांव के बिल्डर मामूली रकम पर बुकिंग कर रहे हैं और बाकी पैसा पजेशन के वक्त देने की बात कह रहे हैं।

6. कोलकाता में सिद्धा ग्रुप और ईडेन रियल्टी ने होम बायर्स को 80 लाख रुपये के इनाम बांटे हैं। मिसाल के तौर पर 54 लाख के अपार्टमेंट पर मुफ्त में नई कार दी गई है।

क्या इन ऑफर्स का कोई असर हो रहा है? बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों से बात करने पर पता चलता है कि डिस्काउंट से होम बायर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। हालांकि इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट्स को इस पर शक है। नाइट फ्रैंक इंडिया के ऐग्जिक्युटिव डायरेक्टर गुलाम जिया ने बताया, 'बिल्डर हर ट्रिक आजमा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें सेल्स बढ़ाने में बहुत मदद नहीं मिली है। 80:20 स्कीम और कस्टमर्स की ओर से बिल्डर के कुछ समय तक इंट्रेस्ट चुकाने जैसी स्कीम चल रही हैं, लेकिन इन्हें बहुत सफलता नहीं मिली है।'

एक्सपर्ट्स का कहना है कि होम लोन रेट्स में कमी आने पर बायर्स मार्केट में लौटेंगे। दीपक पारेख का कहना है कि 2015 में रेट में 1 पर्सेंट की कटौती और हो सकती है। आरबीआई पहले ही 0.25 पर्सेंट की कटौती पॉलिसी रेट में कर चुका है। उनका कहना है कि इससे ईएमआई कम होगी। पारेख के मुताबिक, जुलाई के बाद घरों की बिक्री बढ़ सकती है। पारेख की यह बात बिल्डर्स के लिए अच्छी खबर है। उनके पास इतने घर हैं, जिन्हें आज के मंथली एवरेज के हिसाब से बिकने में 39 महीने लग सकते हैं। इसलिए होम बायर्स के लिए आगे और अच्छा वक्त आ सकता है।

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