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दिल्ली में कर्मचारियों को वेतन के लाले

Friday, March 20, 2015

नईदिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एक ओर जहां जनता को नई सरकार बेहतर परिवहन व्यवस्था देने के लिए दिल्ली परिवहन निगम को दुरुस्त करने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर दिल्ली में परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने वाले डीटीसी कर्मचारी अपने घर तक को चलाने में अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को अब तक फरवरी का वेतन नहीं मिला है।

दिल्ली एनसीआर के अधिकतर क्षेत्रों में सफर करने वाले लोग डीटीसी बसों पर निर्भर हैं। ब्लू लाइन बंद होने के बाद डीटीसी बसों पर भार और बढ़ गया है। वर्तमान समय में दिल्ली की सड़कों पर 11 हज़ार बसों की ज़रूरत है जबकि डीटीसी के बेड़े में केवल पांच हज़ार बसें ही हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार बसों की कमी पूरी करने के लिए नई बसें खरीदने की बात कर रही है जबकि डीटीसी की खस्ता हालत के साथ-साथ अब कर्मचारियों की हालत भी खस्ता हो चली है। बिना वेतन के अपना घर चलाने के लिए जूझ रहे कर्मचारी किसी प्रकार के धरने या विरोध प्रदर्शन से दूर हैं ताकि दिल्ली की जनता को समस्या न हो।

डीटीसी में मैकेनिक के पद काम करने वाले आलोक सहरावत कहते हैं, "पिछले 30 सालों से हम डीटीसी में दिन रात मेहनत कर रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि नई सरकार आने पर डीटीसी की हालत सुधरने के साथ-साथ हमारे हालात भी सुधरेंगे लेकिन इसके उलट मार्च का महीना खत्म होने को है और हमें फरवरी का वेतन अब तक नहीं मिला है। घर के सभी लोग आर्थिक रूप से मुझ पर निर्भर हैं। आम जनता को तकलीफ न हो इसलिए हम धरना-प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं लेकिन दिल्ली सरकार हमारी सुध तक नहीं ले रही है।"

डीटीसी आम सर्विस संघ के प्रेसीडेंट बलेश कुमार दहिया ने iamin से बातचीत के दौरान कहा, "दिल्ली सरकार एक ओर तो दिल्ली परिवहन निगम व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के वायदे कर रही है दूसरी ओर डीटीसी कर्मचारियों के घरों में चूल्हे ठण्डे पड़े हैं। कानूनन भी सरकारी कर्मचारियों को 10 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए लेकिन सरकार को शायद कोई फर्क ही नहीं पड़ता। परिवहन मंत्रालय से अब भी हमें 23 मार्च के बाद सैलरी देने का आश्वासन दिया जा रहा है। मैं सरकार का पूर्णता विरोध करता हूं और यदि 23 मार्च के बाद भी वेतन नहीं मिलता है तो हम इसके ख़िलाफ़ लेबर कोर्ट में अपील करेंगे।"

जब इस विषय में डीटीसी अधिकारी से बात की गई तो उन्होनें अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, "दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच की कलह का शिकार डीटीसी कर्मचारियों को होना पड़ रहा है। कर्मचारियों का वेतन पीछे से ही रूकी हुई है। कर्मचारियों को आर्थिक तंगी के कारण घर तक चलाने में दिक्कत हो रही है। सरकार तो जैसे आंखें मूंदे बैठी है।"

जब इस विषय पर दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री गोपाल राय से बात करने की कोशिश की गई तो उनके सहयोगी ने एक लंबी प्रक्रिया बताते हुए सवाल लिखित रूप में सचिवालय में देने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।
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