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डाक कर्मचारी हड़ताल पर, डाक व्यवस्थाएं चरमराई

Saturday, March 14, 2015

आष्ठा/मप्र। विकासखंड के ग्रामीण डाक सेवक अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे गांवों में डाक व्यवस्था चरमरा गई है। हड़ताल के चार दिन बीतने के बाद भी अब तक कोई निराकरण नहीं हो सका है।

उल्लेखनीय है कि पूरे जिले में संघ के आव्हान पर 10 मार्च से ग्रामीण डाक सेवक अपनी मांगों को लेकर अनिश्चिकालीन हड़ताल कर रहे हैं। इसके चलते विकासखंड में भी कर्मचारी पोस्ट ऑफिस बंद रखकर हड़ताल पर बैठे हैं। इससे डाकों की वितरण व्यवस्था ठप होकर रह गई है। वहीं डाक का आदान-प्रदान, बचत बैंक जमा निकासी, पेंशन वितरण, बिजली बिल जमा आदि का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। यदि आगामी दिनों में भी हड़ताल जारी रही तो लोगों की मुसीबत और ज्यादा बढ़ सकती है।

कर्मचारियों की ये हैं मांगें
डाक कर्मचारियों की कई प्रमुख मांग हैं। इनमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सर्वोच्च अथवा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में ग्रामीण डाक सेवकों के लिए न्यायाधीश कमेटी द्वारा 21 फरवरी को हुए समझौते पर अमल किया जाए। साथ ही ग्रामीण डाक सेवकों का विभागीय करण करते हुए सभी सुविधाएं स्थाई कर्मचारियों के समान दी जाएं। पोस्टमेन व ग्रुप डी के नियुक्ति नियमों को बंद करते हुए सन 1989 के नियुक्ति नियमों को लागू किया जाए। वहीं अनुकंपा नियुक्ति में लाए गए पाइंट सिस्टम को बंद किया जाए। नकदी की रकम 20 हजार रुपए से घटाकर पांच हजार रुपए की जाए। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को शीघ्र लागू करना है।

मांग पूरी नहीं होने तक जारी रहेगी हड़ताल
ग्रामीण डाक सेवक कर्मचारी संघ के मोहन लाल शर्मा ने बताया कि संघ द्वारा मांगों को पूरा कराने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसके बाद भी आज तक कुछ नहीं हो पाया है। वहीं हड़ताल को चार दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक कोई निराकरण नहीं हो सका है। जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल में भाग लेने वालों में श्याम लाल, रामेशचंद्र, हरिप्रसाद, बाबू लाल वर्मा, मांगी लाल जैन, मेहश, कोक सिंह ठाकुर, राम सिंह ठाकुर, चेन सिंह, चंदर सिंह, रामनारायण आदि हैं।

पेंशनधारियों की बढ़ी समस्या 
पोस्ट ऑफिस के ग्रामीण कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पेंशनधारियों को हो रही है। उनकी भी पेंशन नहीं मिल पा रही है। 

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