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patna university में हड़ताल शुरू, काम ठप

Wednesday, March 11, 2015

पटना। पटना विवि प्रशासन के तमाम दबावों के बावजूद कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार से प्रारंभ हो गया. कर्मचारियों ने दोपहर ढ़ाई बजे से यूनिवर्सिटी का सारा कामकाज ठप रखा. वहीं पीयू में कर्मचारियों की ओर से एक मात्र सीनेट सदस्य रघुराम शर्मा 36 घंटों की भूख हड़ताल पर बैठ गये. कर्मचारियों ने परीक्षाओं को बाधित नहीं किया. वहीं परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों को भी हड़ताल से बाहर रखा. कर्मचारियों ने कहा कि छात्रों का अहित करना हमारा मकसद नहीं है और अगर ऐसा मकसद होता, तो हमलोग पूरे दिन हड़ताल करते.

विवि प्रशासन कर्मचारियों को हल्के में न ले : कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उमेश सिंह ने कहा कि विवि प्रशासन कर्मचारियों को हल्के में लेने की भूल ना करें. अगर विवि प्रशासन का यही रवैया रहा, तो कर्मचारी पूर्णरूप से कामकाज को ठप करेंगे और इसके लिए पूरी तरह से विवि के कुलपति और रजिस्ट्रार जिम्मेवार होंगे. प्रदर्शन में संघ के महासचिव रणविजय, नसीम खां, मिंटू कुमार, पवन कुमार साह, राजेश कुमार, सरोज, मुकेश, मनीष समेत विवि व विभिन्न कॉलेजों के कई कर्मचारी शामिल थे.

आधे दिन ठप रहा कामकाज
आधे दिन कामकाज ठप रहने से भी यूनिवर्सिटी का कार्य काफी हद तक बाधित रहा. रजिस्ट्रार ऑफिस में कई सारे काम पेंडिंग थे. वहीं हड़ताल की वजह से यूनिवर्सिटी में अधिकारी भी काफी कम नजर आ रहे थे. यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो वाइसी सिम्हाद्री भी पटना से बाहर चले गये. कर्मचारियों ने कहा कि अब तक वार्ता के लिए कोई नहीं आया है और ना ही मांगे मानी गई हैं. जब तक मांगे नहीं मानी जायेगी, हड़ताल जारी रहेगा. सीनेट सदस्य रघुराम शर्मा ने कहा कि जब तक प्रोन्नति, अनुकंपा पर नियुक्ति, ग्रेड पे की बकाया राशि का भुगतान, कर्मचारियों के लिए आवास का निर्माण, एसीपी योजना का लाभ एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा सामंजन की मांगों की पूर्ति विवि प्रशासन नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उपवास के समर्थन में प्रो आशा सिंह, प्रो कुमुदनी सिन्हा, प्रो एनके चौधरी, डॉ वरुण शर्मा आदि धरने पर बैठे.

इस तरह का बयान जनतांत्रिक अधिकारों का हनन है. ये कर्मचारियों के संघर्ष को और तेज करेगा. यह भड़कानेवाला बयान है. कर्मचारियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छात्रों की परीक्षाओं में उनके आंदोलन से किसी भी प्रकार से नुकसान ना हो, लेकिन अपनी मांगों को रखने का उन्हें पूरा अधिकार है और कैंपस में प्रदर्शन में कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए. वीसी को चाहिए कि कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता पूर्वक विचार करें और उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें. जहां तक उनकी मांगें जायज हैं उन्हें संभव हो तो पूरा करें. अशोक राजपथ और गांधी मैदान जाने की बात कहना इस बात की सूचना है कि हम आपकी बात को सुनने को तैयार ही नहीं हैं. हर चीज डंडे से नहीं होती. कुलपति को ऐसा काम करना चाहिए कि हड़ताल की नौबत ही ना आये. यही एक सुयोग्य कुलपति की पहचान है.
प्रो मटुक नाथ चौधरी,
हिंदी विभाग, बीएन कॉलेज

कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है. इसको लेकर कार्रवाई चल रही है. कर्मचारी सहयोग कर रहे हैं. हम इस स्थिति को हैंडल कर लेंगे.
सुधीर श्रीवास्तव,
रजिस्ट्रार, पीयू

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