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जियो सिम ब्लैक होने का बड़ा अड्डा बना उत्तर प्रदेश का बरेली

Sunday, September 11, 2016

रामजी मिश्र 'मित्र'/बरेली (उत्तर प्रदेश)। जबसे जियो सिम आया है तबसे इसकी चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही। इसके चर्चा की बड़ी वजह बना है इसका फ्री बताया जाना। और तो और तीन महीनो तक तमाम सुविधाओं का भी मुफ्त मिलना इसकी जोरदार चर्चा का बड़ा कारण बनकर उभरा है। जियो सिम के बाजार में उतरते ही लोगों का हुजूम इसे पाने के लिए जगह जगह उमड़ने लगा और यही से शुरू हुआ जियो की ब्लैक मार्केटिंग का फलता फूलता धंधा। जानने में यह बात भले ही अटपटी लगे लेकिन जियो सिम मुफ्त में पाना जीतनी टेढ़ी खीर है इसे ब्लैक में उतनी ही आसानी से पाया जा सकता है। 

जियो सिम की सबसे ज्यादा तादाद में कालाबाजारी इन दिनों उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हो रही है। जियो सिम में मुफ्त में मिल रही तमाम सेवाओं के चलते सिम को पाने के लिए बड़ी तादाद में ग्राहक तैयार हो चुके हैं जिसे अब काला बाजारी के दलालों को सीधा लाभ मिलना शुरू हो गया है। इसकी ब्लैक मार्केटिंग की मजबूत भूमि तैयार करने में रिलायंस के बरेली के स्टोर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ग्राहकों को कई स्टोर पर सीधे सिम न होने की बात कहकर शुरुआत से ही मना किया जाने लगा जिससे वह उसे ब्लैक में खरीदने को मजबूर होने लगे। देखते ही देखते फ्री में दी जाने वाली सिम बरेली में खुलेआम 500 रूपये से छः सौ रूपये तक में दुकानदारों के माध्यम से बेचीं जाने लगीं। 

क्षेत्र में तैनात अधिकारी, पड़ने वाले  स्टोर और दुकानदारों की पांचों उंगलियाँ घी में पहुच गईं। बरेली शहर में सिम को ब्लैक करने का सबसे आला तरीका दामोदर पार्क के पड़ोस में स्थित रिलायन्स मिनी स्टोर ने अपनाया। सबसे पहले इस स्टोर ने एक बड़े पोस्टर पर लिखा सिम उपलब्ध नहीं हैं और उसे बाहर की तरफ चिपका दिया जिसे देखकर बहुत से सिम ग्राहक निराश होकर वापस लौटते रहे। कुछ ग्राहक जो फिर भी पूछ ताछ करते थे कि सिम कब आएगी तो उनके लिए उत्तर होता था कल आइयेगा। जब अगले दिन ग्राहक जाता था तो जवाब होता था दो दिन बाद आओ इस तरह से लोगों को कई कई दिन परेशान किया जाने लगा वहीँ दूसरी ओर सीवी गंज में अप्सर , मढ़ी नाथ में डी के कॉम्युनिकेशन, रेलवे स्टेशन सहित कई जगहों पर सिम बिक्री हेतु हर समय उपलब्ध होते थे। 

रिलायन्स के मिनी स्टोर के इस मामले की जांच के लिए जब सिम खरीदने की बात की गई तो उनका जवाब था कल आना टोकन मिलेगा वह भी सिर्फ पचास लोगों को उसमे भी दस बजे से दस बजकर दस मिनट तक ही। अगले दिन मामले की पड़ताल के लिए जब देखा गया तो पता चला लोग सुबह आठ बजे से लाईन में लगे हुए थे। दस बज गए फिर साढ़े दस का टाइम हो गया। ग्यारह बजे जब उनसे इस बाबत पूंछा गया तो मिनी स्टोर पर कार्यरत सेल्स असोसिएट अर्पित सक्सेना ने बताया सिम तो हैं ही नहीं। यह पूछे जाने पर आप तो टोकन की बात कर रहे थे तो वह बोले अब हम टोकन किसी को नहीं देते। धीरे धीरे दोपहर के दो बज चुके थे कुछ एक आध लोग फ्री के सिम के चक्कर में चक्कर खा कर गिर गए और जब होश आया तो लोगों ने घर जाने की सलाह दी। आखिर सिम न दिए जाने और लोगों को सही बात न बताने के सवाल पर उसने बताया कि हमने सिम किसी को मना थोड़े ही किया है। कुछ देर बाद केवल पच्चीस लोगों को सिम बाटने की बात कह कर शेष सभी लाइन में लगे लोगों को वापस भेज दिया गया । 

जो पच्चीस रह गए उनमें भी एक व्यक्ति को सिम मिलने में लगभग दस मिनट का समय लगाया जा रहा था। भले ही मिनी स्टोर सिम खुद ब्लैक न करते हो लेकिन बरेली की दुकानों पर फिर यह सिम कहाँ से आ गए और इन्हें चालू कौन करता है। स्टोर से लिए गए सिम चालू होने में दस से पंद्रह दिन लगते हैं यह जानकारी भी स्टोर द्वारा दी गई। अम्बानी की जियो को पाना आखिर इतना जटिल इसी लिए बनाया गया ताकि लोग उसे खुले आम ब्लैक में खरीदने को विवश हो जाएं। स्टोर पर मौजूद ग्राहकों सहित तमाम ग्राहकों ने इस दिक्कत की बात को खुले तौर पर स्वीकार किया है। लोगों की माने तो वह लगातार पंद्रह दिन से स्टोर के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें सिम नहीं मिला हर दिन कोई न कोई बहाना बता दिया जाता है। लोगों को फ्री में सिम के नाम पर घंटो धूप में खड़ा कर दिया जाना कंपनी में व्याप्त भ्रष्टाचार की खुलेआम कहानी सुनाता नजर आ रहा है। 

एक तरफ अम्बानी पंन्द्रह मिनट में सिम चालू करने की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर स्टोर में उसके पंद्रह दिन में चालू होने की बात कही जा रही है। अम्बानी भले ही अपने सिम को फ्री बता रहे हों लेकिन इसको सुविधापूर्वक प्राप्त करने के लिए आपको दलालों को पांच सौ से छः सौ रुपए देने पड़ेंगे। कंपनी के कुछ अधिकारियों की मनमानी के चलते फ्री सिम के नाम पर जनता से खूब धन उगाही खुले आम खबर लिखे जाने तक जारी है।
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